क्या आपने सोलर इन्स्टालेशन सही करवाया है?

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भारत में सोलर पैनल का विस्तार बहुत तेज़ी से हो रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ साथ आम जनता ने भी जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण को गंभीरता से समझना शुरू कर दिया है। अगर आप भी अपने घर या ऑफिस में सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं तो उससे पहले आपको विभिन्न बातों का ख्याल रखना होगा। सोलर पैनल की कीमत कितनी होगी, विद्युत संबंधी ज़रूरत को पूरा करने के लिए कितने वाट के सोलर पैनल की ज़रूरत होगी, कितनी बैटरी और कितने पैनल लगवाने होंगे, ऑन ग्रिड सोलर लेना है या ऑफ ग्रिड बेहतर होगा आदि अनेक प्रकार के सवाल आपके दिमाग में आ सकते हैं और ये स्वाभाविक भी है। जैसे जैसे सोलर का विस्तार हो रहा है, विभिन्न कंपनियाँ इस क्षेत्र में अपना कदम रख रही हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। जीनस इंडिया भी ऐसी ही जानी मानी कंपनी है जिसने सोलर क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल कर विभिन्न उपकरण बनाएँ हैं। इसके अलावा जीनस इंडिया एक प्रसिद्ध सोलर पैनल इंस्टालेशन कंपनी भी है।

आज जीनस इंडिया आपको बताएगा कि घर या ऑफिस में सोलर इन्स्टालेशन का सही तरीका क्या है और ध्यान रखने वाली बातें कौन सी हैं:

1. सोलर पैनल की दिशा

सोलर पैनल लगवाने के विषय में सबसे ज़्यादा ज़रूरी बात होती है कि सोलर पैनल की दिशा ऐसी होनी चाहिए जिससे सोलर पैनल के ऊपर अधिकतम रोशनी पड़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर पैनल के लिए दक्षिण दिशा सबसे उचित मानी जाती है। चूंकि भारत की भौगोलिक परिस्थिति उत्तरी गोलार्ध में है तो यहाँ के घरों के लिए दक्षिण दिशा में सोलर पैनल लगवाना फायदेमंद साबित होगा।

2. सोलर पैनल का एंगल

दिशा के बाद सबसे ज़रूरी चीज है कि आपको सोलर पैनल का एंगल कैसा रखना चाहिए ताकि आपको अधिकतम ऊर्जा और सही दक्षता मिल सके। इसके लिए आपको सोलर पैनल को थोड़ा झुकाव के साथ लगाना होगा ताकि अधिकतम ऊर्जा प्राप्त हो सके। आप इसके लिए सोलर ट्रैकर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आपके घर की स्थिति के हिसाब से सोलर इन्स्टालेशन कंपनी सोलर पैनल का सर्वश्रेष्ठ कोण तय करती है। एक सही सोलर कंपनी आपके घर के एलिवेशन के हिसाब से ही सोलर पैनल का एंगल निश्चित करती है।

3. सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया

एक बार जब आप दिशा और कोण तय कर लेते हैं तो बात आती है सोलर पैनल को फिक्स करने की। रूफटॉप सोलर माउंट की मदद से सोलर पैनल को फिक्स किया जाता है। यह पैनल बोल्ट, ब्रैकेट आदि की मदद से लगाए जाते हैं ताकि प्रतिकूल मौसम में भी ज़्यादा सालों तक चल सकें।

4. सोलर पैनल इन्स्टालेशन

इस प्रक्रिया में सोलर इन्स्टालेशन कंपनी आपकी रूफटॉप पर सोलर पैनल लगाएगी और इसके बाद वे आपके सिस्टम में इलेक्ट्रिकल वाइरिंग करेंगे जो इलैक्ट्रिकल पैनल और जनरल पावर सिस्टम से जुड़ेगा। अच्छी वाइरिंग से आपको विद्युत उत्पादन में न्यूनतम नुकसान होगा। इसके बाद डाइरैक्ट करंट की ऊर्जा को अल्टेर्नेट करंट में बदलने के लिए पैनल में इंवर्टर लगाया जाता है। इन्स्टालेशन की पूरी प्रक्रिया में 3 से 5 दिन का समय लगता है लेकिन यह आपके सोलर पैनल के आकार पर भी निर्भर करता है। अगर आप नेट मीटरिंग के पावर मीटर भी लगवा रहे हैं तो इन्स्टालेशन का समय बढ़ जाएगा।

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5. सोलर इंवर्टर और सोलर बैटरी जोड़ें

अगर आप ऑफ ग्रिड सोलर पैनल चुन रहे हैं तो इसमें आपको बैटरी की ज़रूरत होगी ताकि बैकअप के लिए बिजली इकट्ठा की जा सके। बैटरी को सोलर इंवर्टर से जोड़ा जाता है ताकि इसे सोलर पैनल और ग्रिड से चार्ज किया जा सके।

6. सोलर सिस्टम के लिए अर्थिंग स्टैंड

यह स्टैंड लगवाना बहुत ज़रूरी होता है ताकि आपके सोलर सिस्टम को ज़रूरी सुरक्षा मिल सके, ओवरलोड से बचाया जा सके, वोल्टेज को स्टेबिलाइज़ किया जा सके और दुर्घटनाओं से बचाया जा सके।

ऊपर बताई गयी बातों के अलावा और भी कई बातें हैं जिनके बारे में ध्यान रखना बहुत ज़्यादा ज़रूरी होता है। कोई भी सोलर पैनल चुनने से पहले आपको यह भी ध्यान देना होगा कि सोलर पैनल की दक्षता, सहनशीलता, वारंटी पीरियड आदि क्या है। जीनस इंडिया जैसी सोलर पैनल इंस्टालेशन कंपनी से सोलर पैनल लगवाने पर आपको बेहतरीन उत्पाद और सेवाएँ मिलेंगी।