धरती पर हरित ऊर्जा स्रोतों का महत्त्व

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वर्तमान में हमारी जीवन शैली एवं विद्युत् पर निर्भरता देखकर विद्युत् के बिना जीवन की कल्पना करना नामुमकिन है। विद्युत् सम्बन्धी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हम ज़्यादातर जीवाश्म, कोयला, पेट्रोल, डीज़ल आदि पर निर्भर रहते हैं। समय के साथ-साथ धरती से यह ऊर्जा स्रोत समाप्त हो रहे हैं जिसके कारण इन स्रोतों से उत्पन्न होने वाली विद्युत् के दाम भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। विद्युत् उत्पन्न करने के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करना न केवल आपके बजट पर प्रभाव डालता है बल्कि इससे पर्यावरण को भी क्षति पहुँचती है। जीवाश्म, कोयला, डीज़ल, पेट्रोल आदि जैसे ऊर्जा स्रोतों से उत्पन्न होने वाली बिजली से हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है जिनमे मीथेन एवं कार्बन मोनोऑक्साइड भी शामिल हैं तथा इस गैसों से वृक्षों, हवा, एवं धरती पर मौजूद सभी प्राणियों को नुक्सान होता है। इन्हीं कारणों से इस तरह के ऊर्जा स्रोतों को अस्वच्छ ऊर्जा स्रोत की श्रेणी में रखा गया है। दुनिया के वैज्ञानिकों का मानना है कि इन ग्रीनहाउस गैसों के कारण हर साल धरती का तापमान बढ़ रहा है तथा इनसे होने वाली गंभीर बीमारियों के साथ साथ अन्य सभी जीव-जंतुओं पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। कोयला, डीज़ल, पेट्रोल, गैस आदि सभी गैर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत का उदाहरण हैं जिसका अर्थ है कि एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा इनका इस्तेमाल कर पाना संभव नहीं है तथा धरती पर इन ऊर्जा स्रोतों की मात्रा तेज़ी से समाप्त हो रही है।

वैज्ञानिकों ने ऊर्जा के क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से विद्युत् उत्पन्न करने की तकनीक ईजाद कर ली है तथा इस तरह की ऊर्जा स्रोत का विस्तार भी तेज़ी से बढ़ रहा है। सौर, वायु, जल आदि नवीकरणीय ऊर्जा के उदाहरण हैं जिन्हे एक से ज़्यादा बार भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन ऊर्जा स्रोतों से विद्युत् उत्पन्न करने में न्यूनतम ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है तथा लम्बे समय के लिए इस तरह के ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करना पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित नहीं होता है। विभिन्न देशों ने अब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है तथा इन्हें बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाओं की भी शुरुआत की है ताकि यह ज़्यादा से ज़्यादा क्षेत्रो में विस्तृत हो सके।

हरित ऊर्जा की बात की जाये तो सौर ऊर्जा, जल ऊर्जा, वायु ऊर्जा आदि ही प्रमुख ऊर्जा विकल्पों के तौर पर गिने जाते हैं तथा इनमें से भी सौर ऊर्जा की वृद्धि एवं विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

सौर ऊर्जा- सूरज से सीधे ऊर्जा प्राप्त कर विद्युत् उत्पन्न करने के लिए सौर ऊर्जा हरित ऊर्जा का सर्वाधिक प्रचलित विकल्प है जिससे उत्पन्न बिजली से पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान होता है तथा इसकी कीमत भी कम है। भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े-बड़े सोलर पैनलों की स्थापना करने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न उपलब्धियाँ तो हासिल हुई ही हैं साथ ही देश में भी सर्वाधिक जनता ने सोलर गीजर, सोलर कुकर, वाहन आदि का इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है। सोलर ऊर्जा से विद्युत् उत्पन्न करने के लिए सूरज की किरणों को एकीकृत करके फोटोवोल्टाइक सेल की मदद ली जाती है। सौर पैनलों में ढेर सारे फोटोवोल्टाइक सेल लगे होते हैं जो सूरज की किरणों में मौजूद इलेक्ट्रान को विद्युत् में परिवर्तित करते हैं। भारत में सरकारी स्तर पर भी ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सौर ऊर्जा की वृद्धि एवं विकास की दिशा में विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत की गयी है जिसके तहत आम जनता तथा संस्थानों को सोलर पैनल लगवाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी मुहैया करवाई जाएगी। भारत की जनसंख्या, इसकी भौगोलिक स्थिति, तथा सौर ऊर्जा के लिए पर्याप्त तापमान के कारण भारत में सौर ऊर्जा हरित ऊर्जा का आदर्श स्रोत बनकर उभर रही है। पिछले कुछ वर्षों से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने उम्दा प्रदर्शन दिखाया है तथा विश्व पटल पर सौर शक्ति के रूप में दसवें स्थान पर अपना नाम दर्ज करा लिया है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का सर्वाधिक विकास देखकर विदेश की विभिन्न कम्पनियाँ भी भारत में निवेश करने तथा भारत में आकर व्यापार करने के लिए आकृष्ट हो रही हैं और इससे विश्व पटल पर भारत की आर्थिक छवि भी बेहतर हो रही है।

पिछले कुछ दशकों से विश्व की जनसंख्या, ऊर्जा स्रोतों की कीमत एवं आधुनिक तकनीक तेज़ी से बढ़ रही है जिसके कारण विश्व स्तर पर ऊर्जा की ज़रूरत तथा मांग भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही है। बढ़ते प्रदूषण के साथ साथ बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाने के लिए कोयले, डीज़ल, पेट्रोल आदि जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल पर नियंत्रण के लिए हरित ऊर्जा स्रोत ही उज्जवल भविष्य का एकमात्र विकल्प रह गया है। इस तरह के ऊर्जा स्रोतों के सर्वाधिक इस्तेमाल के लिए हरित ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता है।

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