भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य

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भारत की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां पूरे साल में औसतन 300 दिनों धरती पर धूप आती ही है और ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य स्वर्णिम है। बिजली उत्पन्न करने के लिए पारम्परिक संसाधनों जैसे कोयला, पेट्रोलियम, जीवाश्म आदि का उपयोग करना हर दिन महंगा होता जा रहा है और बढ़ती महंगाई की वजह से लोगों के लिए बिजली ख़र्च भी ऐसी समस्या बन गयी है जिससे छुटकारा पाना बहुत ज़रूरी है। इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए लोग बिजली उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक हो रहे हैं एवं राज्य तथा केंद्र सरकारें भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएँ प्रदान कर रही हैं। भारत में सौर ऊर्जा बहुत तेज़ी से उभरकर सामने आ रही है और घरों के अलावा लोग ऑफिस, खेतों आदि में भी सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि बिजली की बढ़ती कीमत ही एकमात्र कारण नहीं है कि लोग सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक हो रहे हैं बल्कि समय के साथ साथ लोगों में पर्यावरण के लिए भी जागरूकता बढ़ गयी है। बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले पारम्परिक संसाधनों के कारण ग्लोबल वार्मिंग यानी धरती के तापमान में बढ़ोत्तरी होती है जिससे पर्यावरण को क्षति हो रही है।

 

सौर ऊर्जा के लिए सरकार की परियोजनाएं

कुसुम योजना

देश भर में किसानों को सिंचाई के समय बिजली के संकट से जूझना पड़ता है और कभी ज़रूरत से ज़्यादा या कम बरसात होने के कारण किसानों की फसल को गंभीर नुकसान भी होता है। ऐसे में कुसुम योजना की मदद से किसानों को खेती के लिए सौर ऊर्जा के से निर्बाधित बिजली मिलेगी जिससे वे बेहतर खेती करने में सक्षम हो सकेंगे। कुसुम योजना का उद्देश्य है कि वर्ष 2022 तक तीन करोड़ सिंचाई पम्पों को डीज़ल या बिजली के बजाय सौर ऊर्जा से चलाया जायेगा. किसान अपनी गैर उपजाऊ ज़मीन पर सौर उपकरण लगाकर उस ज़मीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

सोलर सब्सिडी स्कीम

इसके अलावा केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग के लिए सोलर सब्सिडी स्कीम की शुरुआत भी की है जिसमें देश भर में लोगों को सौर ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी मिलेगी।

सोलर सब्सिडी स्कीम से जुड़ी ज़रूरी बातें:

  1. इस योजना के तहत सामान्य दर्जे के राज्यों को सौर उपकरण लगवाने के लिए कुल लागत का 30% एवं विशेष दर्जे के राज्यों को 70% ख़र्च केंद्र सरकार द्वारा मिलेगा।
  2. इस योजना में वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्र शामिल नहीं है।
  3. इसके अलावा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग एवं सरकारी संस्थान इस योजना श्रेणी के पात्र नहीं होंगे।
  4. इस सब्सिडी योजना से केंद्र एवं राज्य स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता एवं निर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
  5. इस योजना के तहत अपनी भूमि पर लगाए सौर उपकरण से लोग बिजली उत्पन्न कर सकते हैं तथा साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड को बेचा जा सकता है जिससे लोगों की आमदनी भी होगी और ऊर्जा व्यर्थ भी नहीं होगी.

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन

ऊपर बताई गई योजनाओं के अलावा भारत सरकार ने राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन की भी शुरुआत की है जिसे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन भी कहा जाता है। वर्ष 2009 में तत्तकालीन सरकार द्वारा इस मिशन का शुभारंभ किया गया था। इस मिशन के तहत वर्ष 2022 तक 20 हज़ार मेगावाट क्षमता वाले सौर ग्रिड की स्थापना और 2 हज़ार मेगावाट वाली गैर- ग्रिड (सोलर ऑफ़-ग्रिड) के सुचारू संचालन के लिए नीतिगत कार्य योजना का विकास करना है।

इस मिशन के लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  1. 2022 तक 20 हज़ार मेगावाट क्षमता वाली ग्रिड से बिजली उत्पन्न करना
  2. 2022 तक 2 करोड़ सौर लाइट के साथ साथ गैर-ग्रिड वाली सौर ऊर्जा का संचालन
  3. देश भर में ऐसी अनुकूल परिस्थितियों की शुरआत करना जहाँ सौर उत्पादन की क्षमता को बढ़ाया जा सके

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन के तहत देश भर में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है तथा विभिन्न क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को पहुंचाया जा रहा है। भारत देश इस नीतियों एवं परियोजनाओं के तहत अपनी दैनिक ज़रूरतों के साथ साथ अन्य क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस तरह की योजनाओं का सम्मिलित उद्देश्य है कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर आदर्श के रूप में स्थापित किया जा सके। इन योजनाओं के सफल कार्यान्वयन से विभिन्न राज्यों, संस्थानों, क्षेत्रों एवं ऑफिसों में सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है। साथ ही घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लोग अपने घर की छतों पर सौर उपकरण भी लगवा रहे हैं जिसके लिए सरकार उन्हें सब्सिडी भी मुहैया कराती है।

चार्जिंग स्टेशन

सरकार की इन योजनाओं के अलावा ऑटोमोबाइल जगत में विभिन्न प्रचलित कंपनियां हैं जिन्होंने सौर ऊर्जा को अपनाना शुरू कर दिया है तथा सौर ऊर्जा पर चलने वाले वाहन बनाने की शुरुआत और ई-चार्जिंग स्टेशन की स्थापना शुरू कर दी है। राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बेहतरीन बनाने के उद्देश्य से भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने सौर ऊर्जा पर चलने वाले वाहन भी बाज़ार में पेश किये हैं। इन वाहनों में लगे सौर उपकरण सूरज की किरणों से चार्ज होते हैं और बिजली में परिवर्तित होकर वाहनों के संचालन में मदद करते हैं। इन वाहनों को चार्ज करने के लिए ई-चार्जिंग स्टेशन की स्थापना की गई है जहाँ सौर उपकरणों से बिजली उत्पन्न की जाती है। सौर ऊर्जा पर चलने वाले वाहनों से आप महंगे पेट्रोल के ख़र्च से भी बचेंगे तथा आप प्रदूषण कम करने में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ज़्यादा से ज़्यादा ऑटोमोबाइल कंपनियां सौर ऊर्जा पर चलने वाले ई चार्जिंग स्टेशन बनवा रही हैं जहाँ आसानी से बिजली पर चलने वाले वाहनों को चार्ज किया जा सकता है।

भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने सौर ऊर्जा को तेज़ी से अपनाना शुरू कर दिया है तथा वे ऐसे ही वाहन बना रही हैं जिन्हें पेट्रोल डीज़ल की बजाय सौर ऊर्जा पर चलाया जा सके। सभी योजनाओं और नीतियों को देखकर यह कहा जा सकता है कि भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है।