जलवायु परिवर्तन: कोयले की क़ीमत सौर ऊर्जा से भी ज़्यादा

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जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय मे बहुत गंभीर विषय के तौर पर सामने आया है जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर होती रहती है। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में विभिन्न संस्थाएँ भी काम कर रही हैं तथा लोगों तक जागरूकता फैला रही हैं कि जलवायु परिवर्तन क्या होता है और इसका संभव निदान क्या हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान में पृथ्वी का औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस है जो पूर्व में बहुत ज़्यादा या बहुत कम था। समय के साथ साथ पिछले कुछ वर्षों में जलवायु में तेज़ी से बदलाव देखने को मिल रहा है जिसके कारण गर्मियाँ लंबी और सर्दियाँ छोटी होती जा रही हैं। ऐसे में यही सवाल उठता है कि जलवायु में इस तरह का परिवर्तन किस कारण से होता है। इसका जवाब भी हम अक्सर सुनते ही रहते हैं कि जलवायु में ऐसा बदलाव ‘ग्रीनहाउस इफेक्ट’ के कारण ही होता है।

ग्रीनहाउस गैसों के कारण न केवल जलवायु पर बुरा असर पड़ा है बल्कि पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओं एवं मानव जाति को भी इनके हानिकारक प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है। ख़ास तरह की जलवायु में मौजूद पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं के विलुप्त होने का ख़तरा भी बढ़ रहा है क्योंकि इन पेड़ पौधों, जीव जंतुओं के लिए ज़रूरी जलवायु में निरंतर बदलाव होता जा रहा है।

पृथ्वी पर उपलब्ध ऊर्जा स्रोतों पर भी जलवायु परिवर्तन का असर देखने को मिलता है तथा वर्तमान में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की क़ीमत जीवाश्म की तुलना में कम हो गयी है। पारंपरिक ऊर्जा स्रोत जैसे कोयला, जीवाश्म, पेट्रोल, डीज़ल आदि की मात्रा पृथ्वी पर कम होती जा रही है जिसके कारण उनकी क़ीमतें लगातार बढ़ रही हैं। साथ ही कोयले से बिजली उत्पन्न करने के कारण प्रदूषक तत्त्वों का उत्सर्जन तो होता ही है साथ ही वैश्विक स्तर पर भी पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। वर्तमान में बड़े पैमाने पर बिजली उत्पन्न करने के लिए कोयले का इस्तेमाल बंद हो रहा है क्योंकि अब लोग पृथ्वी पर होने वाले प्रदूषण को लेकर जागरूक हो चुके हैं तथा वे प्रदूषण कम करने की दिशा में ज़रूरी क़दम उठा रहे हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत पर अन्य देशों की ओर से इस कोयले से बिजली उत्पादन करने पर अंकुश लगाने के लिए दबाव बनाया जा सकता है क्योंकि इससे भारी मात्रा म कोयला उत्सर्जन होता है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक साबित होता है। इसके अलावा, कोयला खनन और परिवहन की क़ीमत बढ़ने की प्रवृत्ति होने के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में कोयले से बिजली उत्पन्न करने की कीमत भी बढ़ेगी। यही नहीं कोयले से बिजली उत्पन्न करने के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी का इस्तेमाल होता है एवं पृथ्वी पर जल संकट भी एक गंभीर समस्या है।

इन्हीं कारणों से वर्तमान में सौर ऊर्जा एवं वायु ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करना कोयले की तुलना में सस्ता साबित होता है। यह दोनों ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के उदाहरण हैं जो सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हैं। यही नहीं भारत की भौगोलिक स्थिति के कारण सौर ऊर्जा एवं वायु ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करना बहुत आसान है। विदेशी मुल्कों की ही तरह भारत में भी प्राकृतिक अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पन्न की जा रही है तथा पृथ्वी पर मौजूद सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर सूरज की किरणों को विद्युत में परिवर्तित किया जा रहा है। भारत के विभिन्न शहरों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की गई है जिसके कारण विदेशी कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू कर दिया है।

वर्तमान में जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या को देखते हुए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकें।

हमें ज़्यादा से ज़्यादा घरेलू सौर प्लांट लगाने चाहिए जिससे कोई भी छोटा निवेशक या उपयोगकर्ता अपनी ज़रूरत की बिजली पा सके। इसे बढ़ावा देने के लिए भारत मे केंद्र एवं राज्य सरकारों ने विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत की है जिसके तहत सौर ऊर्जा संयंत्र की क़ीमत का भुगतान करने के लिए सरकार की तरफ़ से सब्सिडी भी मुहैया कराई जाएगी। इन सभी परियोजनाओं एवं स्कीम के कारण भारत में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के महत्त्व को समझा जा रहा है तथा इन ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पन्न की जा रही है। सरकार की नीतियों एवं परियोजनाओं से भविष्य में भी सौर एवं वायु ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करने में कम से कम ख़र्च आएगा तथा पर्यावरण ग्रीनहाउस जैसी हानिकारक गैसों से भी बचाया जा सकेगा।

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