घरों की सुरक्षा के लिए सौर ऊर्जा और यूपीएस बैकअप

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भारतीय घरों में बिजली पैदा करने के लिये बहुत समय से सौर पैनल की उपलब्धता है लेकिन फिर भी ज़्यादातर भारतीयों के लिए यह आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं था। लेकिन समय के साथ साथ भारत में केंद्र एवं राज्य सरकारों ने विभिन्न नीति-स्तरीय कार्यान्वयन के साथ पिछले कुछ वर्षों में सौर पैनलों की क़ीमत में गिरावट पैदा की है। भारत में सौर पैनल निर्माताओं ने भी अपने स्तर को बढ़ाकर इस दिशा में मजबूत पहचान स्थापित की है तथा संगठित एवं प्रतिस्पर्धा वाले बाज़ार का निर्माण सुनिश्चित किया है। भारत में बिजली की बढ़ती क़ीमतें देखकर हर कोई सौर ऊर्जा पर चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहता है तथा लंबे समय तक बिजली के बिलों को प्रभावी ढंग से कम कर सकते हैं। यही नहीं सौर ऊर्जा  का इस्तेमाल करना आपके कार्बन फुटप्रिंट को भी कम करने में मदद करता है। भारत में बिजली संकट बहुत सालों से है तथा अभी भी यह समस्या पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो पाई है। भारत के छोटे शहरों एवं गाँवों की बात करें तो यह समस्या बेहद गंभीर है जहाँ बिजली के संकट से आज भी लोगों को जूझना पड़ता है। बिजली की समस्या भारतीय घरों में आम बात है जहाँ 20 मिनट से लेकर 8-9 घंटों के लिए भी बिजली कट जाती है। अगर ज़्यादा समय तक बिजली नहीं आती है तो बिजली पर चलने वाले उपकरण जैसे फ्रिज गरम होने लगते हैं तथा अन्य उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पाता है। भारत में अब बिजली के संकट से छुटकारा पाने के लिए लोगों ने सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

भारत में 2 प्रकार के सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जाता है:
ऑफ़-ग्रिड सोलर पैनल सिस्टम एवं ग्रिड कनेक्टेड सोलर पैनल सिस्टम।

  1. ऑफ़-ग्रिड सोलर पैनल सिस्टम
    जब आपके घर में नियमित बिजली कटौती होती है और आप पावर बैकअप  समाधान की तलाश कर रहे हैं तो ऑफ ग्रिड सोलर पैनल सिस्टम आपके लिए उचित है। इस प्रणाली में एक सौर पैनल, एमपीपीटी प्रभारी नियंत्रक, इन्वर्टर और एक बैटरी बैंक शामिल हैं। सौर पैनल प्रकाश को ऊर्जा (या बिजली) में परिवर्तित करता है। प्रभारी नियंत्रक यह सुनिश्चित करता है कि सोलर पैनल में विद्युत का प्रवाह सही ढंग से होता रहे। बैटरियां एक स्टोरेज टैंक की तरह काम करती हैं जो उत्पन्न होने वाली सभी ऊर्जा या बिजली को स्टोर करती हैं। इन्वर्टर एक कार इंजन की तरह होता है, जो बैटरी में संग्रहीत बिजली को ले जाकर उपकरणों की आवश्यकता के अनुसार वोल्टेज को परिवर्तित कर उपकरणों को चलाने में मदद करता है। इसके अलावा सौर हाईब्रिड इन्वर्टर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें सूरज की रोशनी उपलब्ध होने पर बैटरी को चार्ज किया सकता है और सूरज की रोशनी उपलब्ध न होने पर ग्रिड से चार्ज कर सकते हैं।
  2. ग्रिड कनेक्टेड सोलर पैनल सिस्टम
    अगर आप बिजली का बिल कम करने के लिए सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो ग्रिड से जुड़ा सिस्टम आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। ग्रिड से जुड़े सिस्टम में बैटरी नहीं होती है। अक्सर सोलर सिस्टम से बिजली उत्पादन आपके घर में उपयोग की जाने वाली बिजली के उपकरणों के लिए उपयोग किया जाता है। अगर आपके सोलर पैनल में अतिरिक्त उत्पादन होता है तो यह आपकी बिजली वितरण कंपनी को बेच दिया जाता है। अगर आपकी बिजली की खपत सौर पैनल के उत्पादन से अधिक है तो इसकी भरपाई ग्रिड द्वारा की जाती है। इसमें एक इन्वर्टर और एक नेट मीटर लगा होता है। अगर आप ऐसी जगह पर रहते हैं जहाँ नियमित बिजली कटौती होती है तो यह प्रणाली आपके लिये उचित नहीं है क्योंकि ग्रिड फेल होते ही इन्वर्टर काम करना बंद कर देता है और ऐसे में अगर सोलर सिस्टम बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है लेकिन ग्रिड फेल है तो इससे पैदा होने वाली बिजली को आप इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं और वह बर्बाद हो जाती है।

आइए जानते हैं कि यूपीएस के साथ सोलर पैनल कैसे काम करते हैं।
बिजली कटौती के समय भी बिजली से चलने वाले उपकरण यूपीएस की मदद से चल सकते हैं। इसके लिए इन्वर्टर डीसी बैटरी वोल्टेज को एसी में परिवर्तित करता है और घर के उपकरणों को चलाने में आसानी होती है। यूपीएस की मदद से आप बिजली कटौती के कुछ घंटों तक बिजली के उपकरण चला सकते हैं।

यूपीएस बैकअप सिस्टम के फ़ायदे-

  1. आजकल ऐसे इलाक़ों में रहना बहुत मुश्किल हो गया है जहाँ बिजली कटौती की समस्या आम हो तथा लंबे समय के लिए पावरकट होता हो। हम अक्सर ख़बरों में देखते हैं कि चोर, डाकू घरों की बिजली काटकर घर में चोरी करते हैं। ऐसे इलाक़ों में यह बेहद ज़रूरी है कि घर में ऐसी सुरक्षा प्रणाली हो जिसे उचित पावर बैकअप सिस्टम से जोड़ा जा सके। ऐसी स्थिति में सोलर पावर बैकअप सिस्टम से आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि लंबे पावर कट के दौरान भी आपका घर पूरी तरह सुरक्षित रहे।
  2. केवल घर ही नहीं आप अपने ऑफ़िस या दुकानों में भी ऐसी सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर सकते हैं जो सोलर ऊर्जा पर चल सके। आप इन जगहों पर लगे सिक्योरिटी कैमरा को सौर ऊर्जा पर चलने वाले यूपीएस बैकअप सिस्टम से जोड़ सकते हैं और पूरी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
  3. अचानक बिजली कटने पर अगर आप अपने कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहे हैं तो उसे सेव करने में भी आसानी होगी क्योंकि सौर ऊर्जा पर चलने वाले यूपीएस बैकअप से कुछ देर तक कंप्यूटर आसानी से चलता रहता है।
  4. सौर ऊर्जा पर चलने वाला यूपीएस बिजली आने पर अपने आप चार्ज होने लगता है तथा आपको बार बार उसे चेक करने की ज़रूरत नहीं रहती है एवं आप निश्चिंत रह सकते हैं।

ग्रामीण इलाक़ों में सौर ऊर्जा पर चलने वाले सुरक्षा संबंधी उपकरणों से आम जनता को बहुत फ़ायदे हुए हैं तथा उनका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। सौर ऊर्जा पर चलने वाले बिजली के उपकरण जैसे सिक्योरिटी कैमरा, लाइट और अलार्म की मदद से दूर दराज़ के इलाक़ों में रहने वाले लोगों का जीवन आसान और सुरक्षित हो गया है तथा भविष्य में यह स्थिति बेहतर ही होगी।

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