सोलर रूफटॉप सिस्टम के बारे में जानने वाली ज़रूरी बातें

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भारत के ग्रामीण एवं शहरी इलाक़ों में बहुत सारे घर और वाणिज्यिक इमारतें ऐसी हैं जहाँ प्रचुर मात्रा में सूरज की किरणें आती हैं। जिन इलाक़ों में सूरज की किरणें अधिक मात्रा में आती हैं वहाँ सोलर पैनल लगवाकर सौर ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करना भी बहुत फ़ायदेमंद रहता है। सोलर पैनल से बिजली उत्पन्न करने में पैसों की तो बचत होती ही है साथ ही प्रदूषण को भी न्यूनतम नुक्सान होता है। ऊर्जा संसाधनों की घटती मात्रा एवं पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण के प्रति जागरूक मानव जाति सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का रुख कर रही है। सौर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए सोलर पैनलों का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें लगे सोलर सेल सूरज की किरणों को फोटोवोल्टिक प्रभाव से विद्युत् में परिवर्तित करते हैं। आइये जानते हैं सोलर रूफटॉप प्रणाली से जुड़ी ज़रूरी बातें जिनके बारे में आपको पता रहना चाहिए।

सोलर रूफटॉप प्रणाली (सौर छत प्रणाली) क्या है?

जैसा कि आप जानते हैं ऊर्जा को ना उत्पन्न किया जा सकता है, ना ही नष्ट किया जा सकता है, इसे हम सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित कर सकते हैं। सूरज की किरणों में मौजूद फ़ोटॉन जब सोलर पैनल में लगे फोटोवोल्टिक सेल पर पड़ते हैं तो फोटोवोल्टिक प्रभाव से सूरज की किरणें डीसी करंट के लिए इलेक्ट्रॉन्स में बदल जाती हैं तथा ये डीसी करंट तार में प्रवाहित होकर इन्वर्टर तक पहुंच जाता है एवं एसी करंट में बदल जाता है। इसी ऊर्जा को हम विद्युत के रूप में अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। सौर छत प्रणाली के तहत किसी भी आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत और औद्योगिक इमारतों की छतों पर सौर पैनल स्थापित किये जाते हैं। सौर पैनल स्थापित करने के लिए (i) बैटरी से भंडारण सुविधा वाले सौर छत प्रणाली और (ii) ग्रिड कनेक्टेड सौर छत प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है।

यहाँ हम सौर छत प्रणाली के विभिन्न प्रकारों के बारे में पढ़ेंगे:

  1. ऑन-ग्रिड सौर छत प्रणाली
    ऑन-ग्रिड सौर छत प्रणाली में डीसी करंट को इन्वर्टर की मदद से एसी करंट में बदल दिया जाता है तथा उत्पन्न बिजली को ग्रिड में भेज दिया जाता है। ऑन-ग्रिड छत प्रणाली का मुख्य फ़ायदा यह होता है कि अगर आवश्यकता से अधिक विद्युत उत्पन्न हुई है तो आप अतिरिक्त विद्युत को बिजली बोर्ड में भेज सकते हैं तथा ज़रूरत के समय आप उतनी यूनिट का मुफ्त इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ऐसा करने से ऊर्जा के साथ साथ पैसों की भी बचत होगी।
  2. ऑफ़-ग्रिड सौर छत प्रणाली
    ऑफ़-ग्रिड सौर छत प्रणाली में सौर पैनल के साथ इन्वर्टर तथा बैटरी लगी होती हैं। सौर ऊर्जा की मदद से ये बैटरी दिन भर चार्ज होती हैं तथा रात में भी विद्युत् सम्बन्धी ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है। जिन इलाक़ों में मेन ग्रिड से बहुत कम समय के लिए बिजली सप्लाई होती है वहाँ ऑफ़ ग्रिड सौर पैनल बहुत फ़ायदेमंद होते हैं क्योंकि इसमें लगी बैटरी में भंडारण (स्टोरेज) की सुविधा होती है।

सौर छत प्रणाली के मुख्य हिस्से

सौर छत प्रणाली में मुख्यतः सोलर पैनल, इन्वर्टर, बाई-डायरेक्शनल मीटर और बैलेंस सिस्टम की आवश्यकता होती है। बेहतर समझ के लिए हम इन सभी हिस्सों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

सोलर पैनल/फोटोवोल्टिक मॉड्यूल/इलेक्ट्रिक पैनल

सोलर पैनल सूरज की किरणों को बिजली में परिवर्तित करता है। सोलर पैनल सिलिकॉन के सेल, शीशे, पॉलिमर, और एल्युमिनियम से बने होते हैं. सोलर पैनल का आकार, रंग, प्रकार और रूप आदि ज़रूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह के होते हैं। 12 या 24 वोल्टेज रेटिंग वाले सौर पैनल का इस्तेमाल मुख्यतः ऑफ़-ग्रिड प्रणाली के लिए होता है। 36, 60 और 72 सेल वाले सोलर पैनल का इस्तेमाल ग्रिड-कनेक्टेड छत प्रणाली के लिए होता है।

सोलर इन्वर्टर:

बैटरी की मदद से सोलर इन्वर्टर को डीसी करंट मिलता है और यह करंट एसी करंट में परिवर्तित हो जाता है ताकि हम उस करंट से मिलने वाली बिजली का इस्तेमाल कर सकें।

बैलेंस ऑफ़ सिस्टम:

ऊपर बताये गए उपकरणों के अलावा सौर छत प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण जैसे बिजली की तार, जंक्शन बॉक्स, मीटर, फ्यूज़, सर्किट ब्रेकर आदि सभी बैलेंस ऑफ़ सिस्टम कहलाते हैं। इन उपकरणों की मदद से सौर प्रणाली के सभी उपकरणों को सही ढंग जोड़ा जाता है ताकि पूरी प्रणाली सुचारु ढंग से काम कर सके।

नेट मीटरिंग क्या है?

देश में बिजली संकट कोई नयी समस्या नहीं है तथा ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती कीमतों से बिजली का बिल भी बहुत ज़्यादा आता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर नेट मीटरिंग की सुविधा दी गयी है जिसके तहत सौर पैनल से बिजली उत्पन्न करने पर आप अतिरिक्त बिजली ग्रिड को सौंप सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप सौर पैनल में 20 यूनिट बिजली का उत्पादन करते हैं लेकिन आपकी खपत सिर्फ 10 यूनिट है तो आप अतिरिक्त 10 यूनिट बिजली ग्रिड को सौंप सकते हैं। नेट मीटरिंग की मदद से बस एक बार पैसे लगाकर आप हमेशा के लिए बिजली बिल से छुटकारा पा सकते हैं।

सौर ऊर्जा का संपूर्ण विस्तार करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों ने विभिन्न परियोजनाओं की भी शुरुआत की है। इन परियोजनाओं से बिजली का अधिकतम उत्पादन करके अर्थव्यवस्था को मज़बूती भी मिलेगी तथा ग्रामीण स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। देश के किसानों को खेती के समय बिजली के संकट से जूझना पड़ता है, ऐसी परिस्थिति में केंद्र सरकार ने कुसुम योजना की शुरुआत की है जिसके तहत वर्ष 2022 तक तीन करोड़ सिंचाई पम्पों को डीज़ल या बिजली के बजाय सौर ऊर्जा से चलाया जायेगा। किसान अपनी गैर उपजाऊ ज़मीन पर सौर उपकरण लगाकर उस ज़मीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा सरकार ने सोलर सब्सिडी योजना की भी शुरुआत की है जिसके तहत सौर ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करने के लिए कुल लागत का तय प्रतिशत सरकार द्वारा दिया जायेगा। इन्ही परियोजनाओं में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन भी शामिल है। इस मिशन के तहत वर्ष 2022 तक 20 हज़ार मेगावाट क्षमता वाले सौर ग्रिड की स्थापना और 2 हज़ार मेगावाट वाली गैर- ग्रिड (सोलर ऑफ़-ग्रिड) के सुचारू संचालन के लिए नीतिगत कार्य योजना का विकास करना है। सरकार द्वारा इन परियोजनाओं की शुरुआत करने का सम्मिलित उद्देश्य है कि भारत को विश्व-पटल पर सौर शक्ति के रूप में विकसित किया जा सके।

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